पिछले कुछ दशकों में भारतीय अर्थव्यवस्था में काफी बदलाव आया है। आर्थिक उदारीकरण के बाद एक तरफ जहां भारतीय दरवाजा विदेशी मल्टीनेशनल कंपनियों के लिए खुल गया, वहीं भारतीय कंपनियों ने भी अपने नए वेंचर अमेरिका, यूरोप, जापान आदि जैसे देशों में खोलने शुरू कर दिए। जिस तरह से आज अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक गतिविधियां बढ रही है, उसे देखते हुए इस क्षेत्र में काफी ब्राइट करियर की उम्मीद की जा सकती है।
Mahak Singh
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रविवार, 23 अगस्त 2009
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