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मंगलवार, 22 सितंबर 2009
सडक पर दो कुत्ते
सडक पर दो कुत्ते आपस में लड रहे थे। पास के दुकानदार को नागवार गुजरा। उसने आवाज देकर कुत्तों को भगाना चाहा, पर कुत्ते लडते-भौकते ही रहे। तब दुकानदार ने सडक से एक बडा-सा पत्थर उठाया और चला दिया उन कुत्तों पर। इसके पहले कि उन्हें पत्थर लगता वे दोनों रफूचक्कर हो गये। और इत्तफाकन वह पत्थर पडोसी की दुकान में जा गिरा और उसका शोकेस का शीशा टूट गया। वह नाराज होकर बुरा भला कहने लगा। पत्थर चलाने वाले दुकानदार ने समझाने की कोशिश की कि उसने जानबूझकर दुकान पर पत्थर नहीं फेंका था। परंतु दूसरा दुकानदार मानने को तैयार ही नहीं था। वह दुकान में हुए नुकसान की भरपाई की मांग कर रहा था। बात यों बढी कि दोनों गाली-गलौज से मारपीट पर उतर आए और फिर ऐसे भिडे कि एक का सर फट गया। मामला पुलिस तक जा पहुंचा। पुलिस मामला दर्ज कर दोनों को वैन में बिठाकर थाने ले जा रही थी कि रास्ते में लाल सिगनल पर गाडी रुकी। पत्थर चलाने वाले ने बाहर झांका देखा, लडने वाले वही दोनों कुत्ते एक जगह बैठे उनकी तरफ कातर दृष्टि से देख रहे थे। पत्थर चलाने वाले शख्स को लगा मानो वे दोनों हम पर हंस रहे हों तथा एक दूसरे से कह रहे हों, यार, ये तो सचमुच के लड गये। दूसरे ने कहा, हां यार, हमें तो लडने की आदत है और हमारी कहावत भी जग जाहिर है परन्तु ये तो हम से भी दो कदम आगे हैं। Mahak Singh
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