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शुक्रवार, 1 अप्रैल 2011

जनसंख्या 1 अरब 20 करोड़ पहुंची .

आबादी की वृद्धि दर में आई कमी...
लिंगानुपात में हुआ सुधार....
नई दिल्ली। भारत की जनसंख्या बीते एक दशक में 18.1 करोड़ बढ़कर अब 1.21 अरब हो गयी है। जनगणना के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, देश में पुरूषों की संख्या अब 62.37 करोड़ और महिलाओं की संख्या 58.64 करोड़ है।
जनसंख्या नियंत्रण के लिये प्रयास कर रहे देश के लिये अच्छी खबर यह है कि आबादी की वृद्धि दर में कमी देखी गयी है। वर्ष 1991 की गणना में आबादी में 23.87 प्रतिशत की वृद्धि देखी गयी थी, 2001 में 21.54 फीसदी की बढ़ोतरी देखी गयी,

जबकि वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार, बीते एक दशक में आबादी 17.64 फीसदी बढ़ी। इस तरह जनसंख्या वृद्धि दर में निरंतर गिरावट दर्ज की गयी है। बीते एक दशक में वृद्धि दर में 3.90 फीसदी की कमी दर्ज की गयी है। केंद्रीय गृह सचिव जी. के . पिल्लै और भारत के महापंजीयक और जनगणना आयुक्त सी. चंद्रमौली द्वारा गुरूवार को यहां जारी जनगणना 2011 के अंतिम आंकड़ों के अनुसार, अब भारत की 1.21 अरब की आबादी अमेरिका, इंडोनेशिया, ब्राजील, पाकिस्तान और बांग्लादेश की कुल आबादी से भी ज्यादा है।

उत्तर प्रदेश देश का सर्वाधिक आबादी वाला राज्य है। अगर उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र के आंकड़ों को मिला दिया जाये तो दोनों राज्यों की कुल आबादी अमेरिका की जनसंख्या से अधिक होगी। अंतिम आंकड़ों के अनुसार, लिंगानुपात में सुधार हुआ है। पिछली जनगणना के मुताबिक देश में प्रति एक हजार पुरूषों पर महिलाओं की संख्या 933 थी जो एक दशक में बढ़कर अब 940 हो गयी है। आबादी में पुरूषों की संख्या 51.54 फीसदी और महिलाओं की संख्या 48.46 फीसदी है। महापंजीयक कार्यालय के आंकड़ों के अनुसार, लिंगानुपात में सबसे अधिक फर्क संघ शासित प्रदेश दमन और दीयू में है, जहां प्रति हजार पुरूषों पर महिलाओं की संख्या 615 है। दादरा और नगर हवेली में लिंगानुपात 775 है। वहीं, केरल में प्रति एक हजार पुरूषों पर महिलाओं की संख्या 1,084 दर्ज की गयी है। पुडुचेरी में लिंगानुपात 1,038 है। बहरहाल, चिंताजनक तथ्य यह है कि छह वर्ष तक की उम्र के बच्चों में लिंगानुपात में आजादी के बाद से सर्वाधिक गिरावट देखी गयी है। पिछली गणना में यह लिंगानुपात 927 था जो अब घटकर 914 हो गया है। साक्षरता की बात करें तो अब देश में 74 फीसदी आबादी पढऩा-लिखना जानती है। साक्षर लोगों की संख्या में बीते एक दशक में 38.8 फीसदी और साक्षरता की दर में 9.2 फीसदी का इजाफा हुआ है। साक्षर पुरूषों की संख्या 44.42 करोड़ और साक्षर महिलाओं की संख्या 33.42 करोड़ है। दिलचस्प रूप से, बीते एक दशक में साक्षर पुरूषों की संख्या में 31 फीसदी, जबकि साक्षर महिलाओं (शेष पृष्ठ ८ पर)
की संख्या में 49 फीसदी का इजाफा हुआ है। उत्तर प्रदेश की आबादी सबसे ज्यादा 19.95 करोड़ है, जबकि लक्षद्वीप में आबादी सबसे कम यानी 64,429 है।
सर्वाधिक आबादी वाले पांच राज्यों में उत्तर प्रदेश के साथ ही महाराष्ट्र 11.23 करोड़, बिहार 10.38 करोड़, पश्चिम बंगाल 9.13 करोड़ और आंध्र प्रदेश 8.46 करोड़ शामिल है।


बाल लिंगानुपात में सर्वाधिक गिरावट
नई दिल्ली। जनगणना के ताजा आंकड़ों के अनुसार देश के पैमाने पर लिंगानुपात में कुछ सुधार होने के बावजूद छह वर्ष तक की उम्र के बच्चों में लिंगानुपात में आजादी के बाद से सर्वाधिक गिरावट देखी गई है। देश के महज छह राज्यों में बाल लिंगानुपात में पिछली जनगणना के मुकाबले सुधार देखा गया, जबकि केंद्र शासित प्रदेशों सहित शेष 27 राज्यों में इसमें गिरावट दर्ज की गई है। वर्ष 2001 की जनगणना में छह वर्ष तक की उम्र के बच्चों में प्रति एक हजार लड़कों पर लड़कियों की संख्या 927 थी लेकिन वर्ष 2011 के आंकड़ों के अनुसार एक दशक में इस आयुवर्ग में लिंगानुपात घटकर 914 हो गया है। जनगणना आयुक्त सी. चंद्रमौली ने आज यहां ये आंकड़े जारी करते हुए कहा कि बच्चों के मामले में लड़कियों के बजाय लड़कों को तरजीह दिए जाने के संकेत देते ये आंकड़े चिंता का विषय हैं। आंकड़ों के अनुसार, बाल लिंगानुपात में पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, गुजरात, तमिलनाड़ु, मिजोरम और अंडमाण निकोबार द्वीप में कुछ सुधार (शेष पृष्ठ ८ पर)
देखा गया है। शेष 27 राज्यों और संघ शासित प्रदेशों में बाल लिंगानुपात में 2001 के आंकड़ों की तुलना में कमी दर्ज की गई है।


उप्र-बिहार की वृद्धि दर में पहली बार आई गिरावट
नई दिल्ली। जनसंख्या को काबू नहीं कर पा रहे उत्तर प्रदेश और बिहार सहित देश के सर्वाधिक आबादी वाले आठ राज्यों में पहली बार आबादी की वृद्धि दर में गिरावट दर्ज की गई है। जनगणना 2011 के आज यहां जारी अनंतिम आंकड़े बताते हैं कि उत्तर प्रदेश और बिहार की जनसंख्या वृद्धि दर में बीते एक दशक में क्रमश: पांच और तीन फीसदी कमी आई है। जनगणना आयुक्त सी. चंद्रमौली के अनुसार, पहली बार 'सशक्तीकरण कार्य समूहÓ वाले राज्यों ़ ़ ़उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, उत्तराखंड, झारखंड, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और उड़ीसा में आबादी वृद्धि दर में गिरावट आई है। जनसंख्या नियंत्रण (शेष पृष्ठ ८ पर)
के मामले में पिछड़ रहे इन आठ राज्यों को केंद्र सरकार ने 2001 में 'सशक्तीकरण कार्य समूहÓ वाले राज्यों में शामिल किया था ताकि वहां जनसंख्या स्थिरीकरण के लिए क्षेत्र आधारित कार्यक्रम चलाए जा सकें। वर्ष 2001 में इन आठ राज्यों की आबादी में हिस्सेदारी 45 फीसदी थी। जनगणना 2011 के अनुसार, उत्तर प्रदेश की आबादी सबसे ज्यादा 19.95 करोड़ है। वहीं, बिहार की जनसंख्या 10.38 करोड़ है। सर्वाधिक आबादी वाले पांच राज्यों में उत्तर प्रदेश और बिहार के साथ ही महाराष्ट्र (11.23 करोड़), पश्चिम बंगाल (9.13 करोड़) और आंध्र प्रदेश (8.46 करोड़) शामिल है।
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